दिल चुरा के मेरा कहते थे चुराया ही नहीं,
उसने आँखों से कभी राज़ बताया ही नहीं,
तुझको गर अजनबी होना है तो हो जा हमसे,
ग़ैर होने का सलीक़ा मुझे आया ही नहीं ।।

Written by >Sayed Arman saif
दिल चुरा के मेरा कहते थे चुराया ही नहीं,
उसने आँखों से कभी राज़ बताया ही नहीं,
तुझको गर अजनबी होना है तो हो जा हमसे,
ग़ैर होने का सलीक़ा मुझे आया ही नहीं ।।

Written by >Sayed Arman saif